सुख सागर आयुर्वेद

सामान्य रोग (Health Diseases)

दमा(Asthma) का सम्पूर्ण इलाज

अस्थमा(Asthma) से आप सब परिचित ही होंगे। आजकल बदलते वातावरणीय प्रदूषण, खान-पान में मिलावट व शुद्धता में कमी के चलते अस्थमा जिसे आम भाषा में दमा भी कहते हैं, के मरीजों की संख्या में वृध्दि के मामले निरंतर प्रकाश में आ रहे हैं। जब किसी व्यक्ति की सूक्ष्म श्वास नलियों में कोई रोग उत्पन्न हो जाता है तो उस व्यक्ति को सांस लेने मे परेशानी होने लगती है जिसके कारण उसे खांसी होने लगती है। इस स्थिति को दमा रोग कहते हैं।अस्थमा (Asthma) एक गंभीर बीमारी है, जो श्वास नलिकाओं को प्रभावित करती है। श्वास नलिकाएं फेफड़े (Lungs) से हवा को अंदर-बाहर करती हैं। अस्थमा होने पर इन नलिकाओं की भीतरी दीवार में सूजन होता है। यह सूजन (Swelling) नलिकाओं को बेहद संवेदनशील (Sensitive) बना देता है और किसी भी बेचैन करने वाली चीज के स्पर्श से यह तीखी प्रतिक्रिया करता है। जब नलिकाएं प्रतिक्रिया करती हैं, तो उनमें संकुचन (Contraction) होता है और उस स्थिति में फेफड़े में हवा की कम मात्रा जाती है। इससे खांसी, नाक बजना, छाती का कड़ा होना, रात और सुबह में सांस लेने में तकलीफ आदि जैसे लक्षण पैदा होते हैं।अस्थमा एक अथवा एक से अधिक पदार्थों के प्रति शारीरिक प्रणाली की अस्वीकृति (एलर्जी) है। इसका अर्थ है कि हमारे शरीर की प्रणाली उन विशेष पदार्थों को सहन नहीं कर पाती और जिस रूप में अपनी प्रतिक्रिया या विरोध प्रकट करती है, उसे एलर्जी (Allergies) कहते हैं।
      हमारी श्वसन प्रणाली जब किसी एलर्जेंस के प्रति एलर्जी प्रकट करती है तो वह अस्थमा होता है। यह साँस संबंधी रोगों में सबसे अधिक कष्टदायी है। अस्थमा(Asthma)  के रोगी को सांस फूलने या साँस न आने के दौरे बार-बार पड़ते हैं और उन दौरों के बीच वह अकसर पूरी तरह सामान्य भी हो जाता है।

लक्षण (Effects) :-
    दमा के दौरे के वक्त मरीज को छाती में दर्द या दिल की धड़कन तेज होने जैसे लक्षण महसूस नहीं होते। मगर वह सांस लेने में परेशानी महसूस करता है। उसकी छाती से सीटी बजने की या घरघराहट (wheezing) की आवाज सुनायी देती है। मरीज तनावग्रस्त (Stressed) और घबराया होता है। उसकी गरदन की नसें फूली हुई दिखायी देती है। वह अपने कंधों को और छाती को जोरों से भीतर खींचता है ताकि सांस लेने में आसानी हो सके। दौरे की सांस लेने में आसानी हो सके। दौरे की उग्र अवस्था में उसके नाखून और जीभ नीली पड़ जाती है और तीव्र खांसी उठती है।

 इसके मुख्य लक्षण कुछ इस प्रकार हैं (Main Reasons):-

1. दमा रोग से पीड़ित रोगी को रोग के शुरुआती समय में खांसी, सरसराहट(sough) और सांस उखड़ने के दौरे पड़ने लगते हैं।
2. दमा रोग से पीड़ित रोगी को वैसे तो दौरे (attack) कभी भी पड़ सकते हैं लेकिन रात के समय में लगभग 2 बजे के बाद दौरे अधिक पड़ते हैं।
3. दमा रोग से पीड़ित रोगी को कफ सख्त (Hard), बदबूदार (Smelly) तथा डोरीदार (Corded) निकलता है।
4. दमा रोग से पीड़ित रोगी को सांस लेनें में बहुत अधिक कठिनाई होती है।
5. सांस लेते समय अधिक जोर लगाने पर रोगी का चेहरा लाल हो जाता है।
6. लगातार छींक (Sneez) आना सामान्यतया अचानक शुरू होता है
7.सांस फूलना, जो व्यायाम या किसी गतिविधि के साथ तेज होती है
8.शरीर के अंदर खिंचाव (Stretch) (सांस लेने के साथ रीढ़ के पास त्वचा का खिंचाव)

दमा होने के मुख्य कारण निम्नलिखित हैं:-


1. खान-पान के गलत तरीके से दमा रोग हो सकता है।
2. मानसिक तनाव (Tension), क्रोध (Anger) तथा अधिक भय (Huge Fear) के कारण भी दमा रोग हो सकता है।
3. खून (Blood) में किसी प्रकार से दोष (Defect) उत्पन्न हो जाने के कारण भी दमा रोग हो सकता है।
4. नशीले पदार्थों (Drugs) का अधिक सेवन करने के कारण दमा रोग हो सकता है।
5. खांसी (Caugh), जुकाम (Cold) तथा नजला रोग अधिक समय तक रहने से दमा रोग हो सकता है।
6. नजला रोग होने के समय में संभोग क्रिया (Sex) करने से दमा रोग हो सकता है।
7. भूख से अधिक भोजन (Over Feeding) खाने से दमा रोग हो सकता है।
8. मिर्च-मसाले (Spices), तले-भुने खाद्य (Junk Food) पदार्थों दमा रोग हो सकता है।
9. फेफड़ों में कमजोरी, हृदय में कमजोरी, गुर्दों में कमजोरी, आंतों में कमजोरी, स्नायुमण्डल (Vian System) में कमजोरी के कारण दमा रोग हो जाता है।
 10. मनुष्य की श्वास नलिका में धूल तथा ठंड लग जाने के कारण दमा रोग हो सकता है।
11. धूल के कण (Dust), खोपड़ी के खुरण्ड (Scalp scab), कुछ पौधों के पुष्परज(पराग), अण्डे (Egg) तथा ऐसे ही बहुत सारे प्रत्यूजनक पदार्थों का भोजन में अधिक सेवन करने के कारण दमा रोग हो सकता है।
12.मनुष्य के शरीर की पाचन नलियों (Digestion Tubes) में जलन (Burning) उत्पन्न करने वाले पदार्थों का सेवन करने से भी दमा रोग हो सकता है।
13. मल-मूत्र के वेग (Flow) को बार-बार रोकने से दमा रोग हो सकता है।
14. धूम्रपान (Smoking) करने वाले व्यक्तियों के साथ रहने या धूम्रपान करने से दमा रोग हो सकता है।यदि गर्भावस्था (Pragnancy) के दौरान कोई महिला तंबाकू (Tobacco) के धुएं के बीच रहती है, तो उसके बच्चे को अस्थमा (Asthma)  होने का खतरा होता है।
15. औषधियों (Medicines) का अधिक प्रयोग करने के कारण कफ़ सूख जाने से दमा रोग हो जाता है।
16. जानवरों से (जानवरों की त्वचा, बाल, पंख या रोयें से) (Animal`s Hairs,Skin or Wings)
17. ठंडी हवा (Cold Air) या मौसमी बदलाव (Changing Environment)
18. पारिवारिक इतिहास (Family History), जैसे  की परिवार में पहले किसी को अस्थमा रहा हो तो आप को अस्थमा होने की सम्भावना है।
19. मोटापे (Fattiness) से भी अस्थमा हो सकता है। अन्य समस्याएं भी हो सकती हैं।
20. सिर्फ पदार्थ ही नहीं बल्कि भावनाओं (Emotions) से भी दमे का दौरा शुरू हो सकता है। जैसे क्रोध, रोना व विभिन्न प्रकार की उत्तेजनाएं (Excitations)।
 
पथ्य;- गाय का दुध ,मौसमी,अंगूर, अनार, सेब फ़ल खायें। कब्ज हो तो शाम को 300-400 ग्राम पपीता खाएं। भोजन में दाल, दलिया, हरी सब्जियां, लोकी, परवल, टिंडा, दुध,तुरई(तोरी),गिलकी आदि सब्जियां अधिक लें। काली मिर्च दाल सब्जी में खायें।

दमें के परहेज;- लाल मिर्च,तेल, गुड़, खटाई, प्याज ,लहसुन, दही,मठ्ठा, आलु, अरबी, बैंगन,तले हुए गारिष्ठ भोजन न करें। शराब, अण्डा, मांस, मछली, गांजा, भांग, अफ़ीम, जर्दा, बिड़ी, सिगरेट,पाऊच, निम्बु आदि का सेवन सख्त मना है।

NOTE:- अगर आप इस रोग से पीड़ित हैं और थक चुके है दवाईयां खा-खाकर, और फ़िर भी आपको आराम नहीं मिल रहा तो मजबूर होकर मत जियें। आयुर्वेद में इसका स्थायी इलाज है। हम सभी रोगों क इलाज़ हस्तनिर्मित आयुर्वेदिक द्वाईयों(Handmade Ayurvedic Medicines)से करते हैं। अतिरिक्त जानकारी के लिए आप हमें सम्पर्क कर सकते हैं, हमारे फ़ोन नम्बर वैबसाइट पर उपलब्ध हैं

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